फटोली खां,जिन्होंने बेसहारा गायों के लिये अपना जीवन समर्पित कर दिया

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अमित मिश्रा, कृष्ण गोपाल शर्मा की रिपोर्ट

फिरोजाबाद। सिर पर अंगौछा और चेहरें पर दाढी-मूछ वाले फटोली खां को शायद आप नही जानते होगें। लेकिन बेसहारा गायें उन्हें देखतें ही पहचान लेती हैं। फटोली उन गायें की सेवा करते हैं जिन्हें लोग किसी काम की ना समझ छोड देतें है। वो उनका उपचार कर उन्हें स्वस्थ बना देतें है।गाय पालन में कई मुशिकलें आने के बावजूद फटोली खा ने हिम्मत नही हारी। पिछलें पच्चीस वषों से बेसहारा,बांझ गायों की सेवा कर रहें फटोली खां ने, इसमें अपना पूरा जीवन समर्पित करने की ठान ली है।

अभी उनके पास साठ गायें हैं। अब,बेसहारा गायें की उनका सब-कुछ है। फटोली अपनी गायों को खुले आसमान के नीचे रखने को मजबूर हैं। क्योकि उनके पास ना तो बडें हाल है ना ही गौशाला। फटोली गौशाला खोलना चाहतें है लेकिन शासन-प्रशासन से उन्हें दुतकार ही मिली। फटोली खां हिन्दू-मुस्लिम एकता की मिसाल कायम किये हुए। उनका कार्य उन लोगों पर तमाचा है जो देश छोडने की बात करतें हैं।

कैसे हुई शुरूआत
फिरोजाबाद के गाँव गगनी में रहने वाले फटोली खाँ पुत्र रामबाबू के सामने एक ऐसी घटना घटी जिसने उन्हें झकझोर दिया। तभी से उन्होंने प्रण कर लिया बेसहारा गायों की सेवा करेगें। घटना करीब पच्चीस साल पुरानी है। गगनी मस्जिद के पास एक गाय घूम रही थी। जिसे लोग मार रहें थेे। मंैने लोगों से उस गाय को बचाया। उसके बाद गाय को मैं अपने घर ले गया। और अपने पास रख लिया। गाय को खाना-पानी दिया। तभी से मेरी गायों के प्रति श्रद्घा बढ गई। फटोली कहतें हैं मेरा पूरा जीवन गायों की सेवा करने में ही निकल गया।

अपने हिस्सें की एक बीघा जमीन बेच दी
फटोली खाँ के सामने ऐसा समय आ गया था जब गायों को खिलाने कि लिये उनके पास कुछ नही था। किसी ने उनकी कोई मदद नही की। गायें कई दिनों से भूख-प्यास से बेहाल थी। एक-आद गायें होती तो खाना खिला भी देतें। सोचा अब क्या करें। कुछ समझ में नही आ रहा था। शायद,उपर वाला उनकी परीक्षा ले रहा था। बिना समय गवाए उन्होंने अपने हिस्सें की एक बीघा जमीन बेच दी। और जमीन बेचकर मिले रूपयों से भूखी गायों के लिये चारें,भूसें की व्यवस्था की। आज फटोली के पास साठ गायें हैं। जिनके चारा-पानी में प्रतिदिन करीब तीन हजार का खर्च आता है। अक्सर,गाय पालन में उनके सामने कई परेशानियाँ आती है। लेकिन वो हताश और निराश नही होते। आस-पास के क्षेत्र में उनकी इस कार्य के लिये खूब प्रशंसा होती है।

गायों को खुले आसमान में रखने को मजबूर
38 वर्षीय फटोली खाँ गायों के लिये गाँव गगनी में एक गौशाला बनाना चाहतें है। इसके लिये उन्होंने सरकार से कई बार गुहार भी लगाई। लेकिन अब तक कोई सुनवाई नही हुई है। वो कहते है शायद,मुसलमान हूँ इस लिए। प्रशासन,विधायक ने भी ध्यान नही दिया। वो कहतें है गौशाला खुल जाने पर गायों का पालन पोषण और अच्छी तरह से हो सकता है। मैरे पास इतने पैसे नही है कि गौशाला बनवा सकूँ। सर्दी में गायें खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।

कैसे करते गायों का पालन पोषण
फटोली बताते है साठ गायों के पालन पोषण पर प्रतिदिन करीब तीन हजार का खर्च आता है। जिन किसानों की गाय दूध नही देती है। बांझ (ठल्य) हो जाती है। वो किसान उन गायों को खेतों मे छोडकर चले जातें हैं। फटोली उन बेसहारा गायों को अपने यहां ले आते है और उनके बांझपन का इलाज करते है। कुछ दिनों के बाद ज्यादातर गायें पूरी तरह से स्वस्थ हो जाती हैं। फटोली गायों के बांझपन के इलाज का अचूख नुस्खा जानतें है। जिससे वह गायों का इलाज करतें है। फिर स्वस्थ गायों को लोंगों को बेच देते है। मिले हुए रूपयों से अन्य गायों का दाना पानी चलातें है। साथ ही प्रतिदिन गायों को खेतो में चराने ले जाते है। लोगों से उन्हें किसी तरह ही आर्थिक मदद नही मिलती है।

हिन्दू-मुस्लिम एकता की मिसाल
जहाँ गाय को लेकर जगह-जगह हिंसक वारदातें सामने आती हैं वही गायों की सेवा करने में अपना पूरा जीवन समर्पित करने वाले फटोली खाँ हिन्दू-मुस्लिम एकता की मिसाल बने हुए है। उन लोगों के लिये आईना है जो हिन्दू-मुस्लिम की बात करते हैं।

 

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