पूर्व पाकिस्तानी एमएलए मांग रहा है भारत में राजनैतिक शरण, पाकिस्तान जाने को तैयार नही, जानिए क्या है कारण ?

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खन्ना. पाकिस्तान से आकर भारत में राजनैतिक शरण मांग रहे पूर्व विधायक बलदेव कुमार के वीजा की 3 महीने की अवधि खत्म हो गई है। बावजूद इसके वह भारत छोडऩे को तैयार नहीं हैं। बलदेव का कहना है कि अब भारत ही उनका देश है। पाकिस्तान में उनकी जान को आतंकियों और आईएसआई से खतरा है, इस कारण वापस नहीं जाएंगे। दूसरी ओर, कानूनी माहिरों की मानें तो जब वीजा भले ही खत्म हो गया, लेकिन जब तक सरकार की तरफ से जवाब पेंडिंग है संबंधित व्यक्ति देश में रह सकता है।

हालांकि अभी तक भारत में राजनीतिक शरण लेने को केंद्र सरकार को भेजे का अब तक कोई जवाब नहीं आया है, लेकिन दूसरी तरफ बलदेव कुमार ने वीजा खत्म होने के कुछ दिन पहले ही सरकार को रिमाइंडर भी भेज दिया था। बलदेव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की कि वह उन्हें भारत में राजनीतिक शरण दें और जल्द उनका वीजा जारी किया जाए। वहीं, माहिरों की मानें तो बलदेव पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हैं और नागरिकता कानून में किए गए बदलाव के तहत वह वीजा पर फैसला आने तक बिना वीजा भी इंडिया में रह सकते हैं।

बलदेव की शादी 2007 में खन्ना की रहने वाली भावना से हुई थी। बलदेव की पत्नी भावना बताती हैं कि ने कहा कि पाकिस्तान में महिलाओं की हालत बदतर है। वह अपनी मर्जी से घरों से बाहर भी नहीं जा सकती। नौकरी करना तो बहुत दूर की बात है। वहां के हालात देखकर ही शादी के बाद भी उन्होंने भारतीय नागरिकता नहीं छोड़ी थी। इन दिनों वह खन्ना के समराला मार्ग पर स्थित मॉडल टाउन में दो कमरों के किराये के मकान में अपने परिवार के साथ दिन गुजार रहे हैं। उनके दो बच्चे 11 साल की रिया और 10 साल का सैम पाकिस्तानी नागरिक हैं। बेटी रिया थैलेसीमिया से पीडि़त है और उसका इलाज चल रहा है। पाकिस्तान में सेहत सुविधाएं नहीं हैं।

सिर्फ 36 घंटे के विधायक रहे बलदेव कुमार ने कुछ महीने पहले परिवार को यहां लुधियाना के खन्ना भेज दिया था। 12 अगस्त को तीन महीने के वीजा पर खुद भी यहां आ गए थे, लेकिन अब वह वापस नहीं लौटना चाहते। बलदेव का कहना है कि अल्पसंख्यकोंं पर पाकिस्तान में अत्याचार हो रहे हैं। हिंदू और सिख नेताओं की हत्याएं की जा रही हैं, इसलिए वह जल्द ही भारत में शरण के लिए आवदेन कर चुके हैं।

बलदेव ने बताया कि साल 2016 में उनके विधानसभा क्षेत्र के विधायक की हत्या हो गई थी। इस मामले पर उन पर झूठे आरोप लगाए गए और उन्हें दो साल तक जेल में रखा गया। 2018 में विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने के दो दिन पहले उन्हें हत्या के मामले में बरी कर दिया गया। ऐसे में वह शपथ लेकर 36 घंटे के लिए विधायक रहे।

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