गीता जैन का चला बल्ला, मुरझाया कमल, हाँथ भी नही रोक पाया विजयरथ

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मीरा भायंदर / शैलेंद्र पांडे / मुंबई –

चुनावी नतीजे आ चुके है और मीरा भायंदर के इतिहास में गीता जैन का नाम प्रथम महिला आमदार के रूप में आज दर्ज हो गया। भारतीय जनता पार्टी के नरेंद्र मेहता और काँग्रेस के मुजफ्फर हुसैन शुरू से गीता जैन के द्वारा बनाई गई बढ़त के नज़दीक भी नही पहुँच पाए और गिनती के हर राउंड के बाद ये फासला बढ़ता ही गया। इस जीत के साथ गीता जैन ने एक नया इतिहास रच दिया है। 

आखिर क्यूँ हारे मेहता?

पार्टी और प्रत्याशी अपने अपने स्तर पर विश्लेषण अवश्य करंगे पर जीत के साथ एक बात तो खुलकर सामने आ गयी कि मीरा भायंदर में जनमत गीता जैन के साथ था। 

1) भीतरघात का बहुत बड़ा खामियाज़ा मेहता को अपनी हार से चुकाना पड़ा है। बहुत सारे नगरसेवक और कार्यकर्ता सिर्फ नाम के लिए ही साथ नज़र आये पर काम वो गीता जैन के लिए कर रहे थे। 

2) सोशल मीडिया और मीडिया में आये दिन नकारात्मक खबरों को मेहता ने या तो गंभीरता से नही लिया या उसे रोकने में उनकी टीम असमर्थ रही। लोकल पत्रकारों का गुस्सा अक्सर उनकी खबरों में देखने को मिला।

3) शिवसेना का मिलाजुला साथ भी एक बड़ी वजह रहा मेहता के हार का। भले ही युति थी लेकिन किसी भी मंच पर इनके दिल मिल गए है ऐसा नज़र नही आया। एक समाचार पत्र के विज्ञापन में ठाणे जिल्हा के सभी प्रत्याशियों के तस्वीरों के बीच मेहता नदारत रहे। 

4) परिवारवाद का मुद्दा बनाकर जहाँ भाजपा काँग्रेस को नीचे खीचने में सफल रही वहीं उनके ही घर का महापौर होने से लोगो के बीच एक गलत संदेश गया। 

5) मेहता ने विकास के दावे तो किये लेकिन जनता को इस बात से वो सहमत नही करा पाए जिसकी वजह से उनके द्वारा किये गए अच्छे कार्यों पर भी पानी फिर गया। 

काँग्रेस का गणित हुआ फेल!

काँग्रेस जिन पुराने आकंड़ों के सहारे मैदान में उतरी थी वो भी फेल होते हुए नज़र आए। जिस तरह का अनुमान उन्होंने लगाया था उसके विपरीत वोटिंग हुई। मुजफ्फर हुसैन भी अपनी सेहत की वजह से जनता से थोड़े दूर हो गए थे। राष्ट्रवादी के दोनों बड़े नेताओं गिल्बर्ट मेंडोंसा और संजीव नाईक पहले ही शिवसेना और बीजेपी में चले गए थे। हालाँकि पारंपरिक काँग्रेस को वोटो में वो तब्दील करने में सक्षम रहे और 50 हज़ार से अधिक वोट उनके पाले में पड़े। 

लगभग 10 हज़ार वोट अन्य के पाले में गए।

अन्य कई पार्टियों और नोटा की वजह से लगभग 10 हज़ार के आसपास वोट यहाँ वहाँ हुए। दो हज़ार से अधिक लोगो ने नोटा का बटन दबाते हुए अपनी असहमति दर्ज कराई।

गीता जैन की जीत से कइयों की उम्मीदें जुड़ी है और अब यह जिम्मेदारी नवनिर्वाचित की है कि वो लोगो के भरोसे पर खरा उतरते हुए शहर का विकास करे। 

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