धरोहर:योग साधना का केन्द्र है देवर्षि नारद मंदिर

गिरिजेश दीक्षित

फिरोजाबाद। प्राचीन काल से ब्लाक नारखी क्षेत्र ऋषि मुनियों और संतों की साधना स्थली रहा है। यह पवित्र क्षेत्र भारद्वाज,पराशर,श्रंगी आदि कई ऋषियों,मुनियों व संतों की तपो भूमि रही है। इसी तपो भूमि में देवर्षि नारद ने भी तपस्या की थी। देवर्षि नारद की तपस्थली ग्राम नारखी मे उनका भी मंदिर है जो ध्यान,योग साधना का केन्द्र बना हुआ है। किवदन्ती के अनुसार प्राचीन समय मे यहां समूचे क्षेत्र मे जंगल था।

इन्ही जगलों में आश्रम बना कर ऋषि,मुनि और साधु सन्त तपस्या में लीन रहते थे। देवर्षि नारद ऋषियों-मुनियों से अक्सर यहां आकर भेंट किया करते थे।एक बार उनका इस क्षेत्र में स्थित श्रंगी ऋषि के आश्रम मे पदार्पण हुआ।श्रंगी ऋषि के आध्यात्मिक शिष्य नरख ऋषि ने उनका स्वागत किया। मुनि नारद ने इसी तपो भूमि में बन खण्डेश्वर महादेव की स्थापना का उत्तम सुझाव दिया। उन्ही की ही प्ररेणा व सहयोग से नरख व श्रंगी ऋषि ने शिवलिंग की स्थापना की थी।

देवर्षि नारद को कुछ क्षण यहा विश्राम करना था वह श्रंगी ऋषि के आश्रम से कुछ दूरी पर एक रमणीक स्थल पर पहुुेंचे और वहां कुक्ष क्षण विश्राम किया और विश्राम के बादउन्होंने भगवान शिव की साधना की।गांव नारखी के निकट इसी स्थल पर देवर्षि नारद का मंदिर भत्र्तो द्वारा निर्मित कराया गया। क्षेत्र के बुजुर्गो ने बताया कि ऋषि नरख ने नारखी ग्राम को बसाया था। वर्षो पूर्व इसी गांव में रह रहे खुशाली नामक जाटव की पत्नी को नारद मुनि ने स्वप्न दिया,अमुक स्थान पर एक कच्चा चबूतरा है इसकी साफ-सफाई देखभाल किया करो। उसी समय जमीदारी प्रथा शुरू हुई थी।

खुशाली की पत्नी ने स्वप्न मे देखा स्थान ढूंढ लिया तथा प्रतिदिन वह उस स्थल की साफ-सफाई करती रही। कई साधू-संत वहां आकर रहने लगें तथा उन साधू-संतों ने उस क्षेत्र के लोगों को योग साधना सिखाना शुरू किया,ध्यान योग से कई लोगों को सिद्वियाँ भी प्राप्त हुई। नारद मुनिके इस आश्रम मे विद्वान साधु संतों का आना-जाना रहा। इसी बीच करू नामक बाबा यहां आये उन्होंने लम्बे समय तक यहा साधना की।

इस तपो भूमि मे पीने का जल खारा है और वर्तमान मे भी अधिकाश क्षेत्र में खारा पानी है। बाबा ने लोगों को पीने के लिय इसी क्षेत्र मे कुआ खुदवाया था जिसका जल ठन्डा और मिठा है। क्षेत्रवासी आज भी उसी कुयें के पानी से खाना पीना आदि कार्य के उपयोग मे लाते है। देवर्षि नारद ने इसी क्षेत्र के ठाकुर कल्लू सिंह की धर्म पत्नी को सत्तर-अस्सी वर्ष पूर्व स्वप्न दिया की यहा नारद मुनि मंदिर का निमार्ण करायें। उस स्वप्न के बाद संवत 2024 मे श्रीमती मायादेवी ने नारद मुनि मंदिर का निमार्ण कार्य शुरू कराया।

जब कच्चें चबूतरे को हटाया गया तब उसके नीचे एक पत्थर निकला उस पर स्पष्टï रूप से लिखा था देवर्षि नारद तपो मुनि। उसी के आस-पास नारद मुनि मंदिर का निमार्ण कराया गया तथा उन्होंने देवर्षि नारद की मूर्ति बनवा कर धार्मिक विधि के अनुसार मूति की प्राण प्रतिष्ठा कर प्रतिष्ठापित करायी गयी।,यहा मां दुर्गा,हनुमान जी व अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमायें प्रथक-प्रथक मंदिरों मे विराजमान करायी गई। इस प्रकार नारद आश्रम पूर्ण रूप से देव स्थान बना हुआ है।

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