रिश्वत के खेल ने सात साल बाद पात्र को बनाया अपात्र

समय भास्कर/ फिरोजाबाद/

सरकार जहां एक तरफ लोगों को अपनी योजनाओं का लाभ दिलाने को कोई कसर नहीं छोड़ती है । वहीं सरकारी तंत्र में शामिल लोग रिश्वत के चलते सरकारी योजनाओं में पलीता लगाने से भी नहीं चूकते हैं।  और कैसे रिश्वत के चंद रुपए ना मिलने के कारण पात्र को अपात्र बना दिया जाता है।  ऐसा ही एक मामला जनपद फ़िरोज़ाबाद के नारखी ब्लॉक के गांव बतरा निवासी त्रिमोहन पाराशर का है।

प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के अंतर्गत 2011 की सूची में इनका आवास लाभार्थियों की सूची में मकान आया था। गांव प्रधान ने  मकान आवंटन को त्रिमोहन से   20000 रुपए  मांगे । रिश्वत न देने के कारण इस पात्र को मिलीभगत से अपात्र बना दिया। इस की शिकायत त्रिमोहन पाराशर ने मुख्यमंत्री से की है।  उन्होंने अपने शिकायती पत्र जिसका नंबर 400147180364490 है में कहा है  कि वह मजदूरी करके अपने परिवार का भरण पोषण करता है । वह तीन छोटे बच्चों व  अपनी पत्नी के साथ मकान मालिक अनिल राजोरिया व राधे राजोरिया के मकान में उनकी कृपा पर  गाव में रह रहा है। मकान मालिक का परिवार गांव में नहीं रहता है।

मकान ना होने के कारण प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण में इनका नाम भी लाभार्थियों की सूची में सम्मिलित था । लेकिन प्रधान सत्य प्रकाश की 20000 रुपए की मांग पूरी ना करने पर आवास रद्द कर दिया । प्रधान द्वारा कहा गया कि ऊपर पैसे देने पड़ते हैं तभी काम होता है। योजना के अंतर्गत कुल 6 अभ्यर्थियों में तीन के आवास बन चुके हैं।  प्रधान द्वारा मुझे धमकी दी गई है कि अगर मैंने इस बारे में शिकायत की या मीडिया को बताया तो गांव में नहीं रह पाओगे।

त्रिमोहन के कहा है कि भ्रष्टाचार के कारण उनका आवास रद्द कर दिया गया है।  अगर मैं पात्र नहीं था तो मेरा नाम लाभार्थी की सूची में कैसे आया।  यह जांच का विषय है। मुख्यमंत्री को शिकायत के माध्यम से उन्होंने आवास दिलाए जाने की एवं भ्रष्टाचार में दोषी लोगों को दंडित करने की गुहार से लगाई है। मामले जानकारी मिलते ही समय भास्कर की टीम ने ग्राम बत्रा का का दौरा किया एवं मौके पर जाकर पीड़ित ग्राम प्रधान । एवं फोन द्वारा सेक्रेटरी अश्वनी कुमार व B D O  नारखी से बात की। सभी ने आरोपों को गलत बताया ।

सेक्रेट्री अश्वनी कुमार से जब बात की गई तो उन्होंने कहा कि सारी जांच के बाद ही इनका मकान रद्द किया गया है।

कुछ प्रश्न है जो सारी प्रक्रिया पर प्रश्नचिन्ह लगाते हैं-

1-प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण में लाभार्थी के सूची में आने योग्यता क्या होती है ।

2-अगर योग्यता योगिता पूरी होने पर लाभार्थी का नाम योजना की सूची में आता है तो किस आधार पर कुछ दिनों बाद उसका आवंटन रद्द कर दिया जाता है।

3-सूची 2011 में तैयार हुई थी मकान 2017 में आए

डीपीआरओ फ़िरोज़ाबाद से जब इस संबंध में बात की तो उन्होंने जवाब न दे कर मामले से अपना पल्ला झाड़ना ही बेहतर समझा और उनसे बात करके ऐसा लगा कि उनके लिए इस तरह की योजनाएं समय की बर्बादी है।

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