ट्रंप की नीतियों से शरणार्थियों के बच्चों पड़ रहा है बुरा असर

कैलिफोर्निया। मिर्सी अल्बा लोपेज का तीन साल का बेटा उन्हें मां मानने तो तैयार नहीं है। इसी प्रकार मिल्का पाब्लो की तीन वर्षीय बेटी भी उनते पास आने से डरती है। इन महिलाओं का दुख आप समझ सकते है, लेकिन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है। उन्हें तो बस अपनी बनाई नीति की प्राथमिकता दिखती है। यो वो महिलाएं है जो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की शरणार्थियों से उनके बच्चों को छीन लेने की नीति ने का शिकार हुई है।

इस नीति के लिए ट्रंप प्रशासन को पूरी दुनिया से आलोचना झेलनी पड़ रही है। आलोचना के बाद ट्रंप ने शरणार्थियों और उनके बच्चों को अलग रखने की नीति को वापस जरूर ले लिया है लेकिन इसका बुरा असर चार माह बाद अब देखने को मिल रहा है।कैलिफोर्निया की कोर्ट के आदेश के बाद शरणार्थियों को अब उनके बच्चों से मिलाया जा रहा है। बच्चे अपने मां-बाप को भूल चुके हैं। वे अपने माता-पिता को पहचान ही नहीं पा रहे।

मां-बाप के बजाय बच्चे उन समाजसेवी महिलाओं के पास जाने की जिद कर रहे हैं जिन्होंने शरणार्थी शिविर में बच्चों की सेवा की। गौरतलब है कि चार महीने पहले ट्रम्प प्रशासन ने गैर कानूनी तरीके से अमेरिका में प्रवेश करने के आरोप में देश की दक्षिण पश्चिम-सीमा पर 2000 बच्चों को उनके माता-पिता से अलग कर दिया था।

ट्रंप की इस नीति से पीड़ित शरणार्थी मिर्सी अल्बा लोपेज (31) ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि मेरा तीन साल का बेटा करीब चार महीने बाद मेरी गोद में आया, लेकिन वह मुझे पहचान नहीं पाया। कोर्ट में भी वह समाजसेवी महिला के पास जाने के लिए रोता रहा।

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