भारत के स्थान पर उत्तर कोरिया के साथ माइक पॉम्पिओ ने की वार्ता, पर नहीं मिला कोई फायदा

वॉशिंगटन। अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पॉम्पिओ उत्तर कोरिया के साथ दो दिनों तक बातचीत के बाद बिना किसी ठोस निष्कर्ष पर पहुंचे ही वॉशिंगटन रवाना हो गए हैं। माइक पॉम्पिओ ने प्योंगयांग से वापसी के समय अपनी यात्रा को लेकर कहा कि दोनों देशों के बीच लगभग सभी मुद्दों पर प्रगति हुई है और यह कुल मिला कर अच्छी वार्ता थी। दूसरी तरफ, उत्तर कोरिया के विदेश मंत्रालय ने पॉम्पिओ के साथ हुई उच्च स्तरीय वार्ता को ‘खेदजनक’ बताया है।

उल्लेखनीय है कि उत्तर कोरिया के साथ वार्ता ही वह बड़ी वजह थी, जिसके कारण ट्रंप प्रशासन ने 6 जुलाई से भारत के साथ होने वाले उच्च स्तरीय संवाद को टालने का निर्णय लिया था। हालांकि, भारत के स्थान पर उत्तर कोरिया ज्यादा तरजीह देकर भी अमेरिका के हाथ कोई महत्वपूर्ण चीज हाथ नहीं लगी है।

नॉर्थ कोरिया ने कहा कि अमेरिका परमाणु हथियार खत्म करने के लिए उसपर एकतरफा दबाव डाल रहा है। पॉम्पियो की दो दिवसीय यात्रा खत्म होने और वहां के अधिकारियों से बातचीत के कुछ देर बाद ही यह बयान सामने आया है।

हालांकि, उत्तर कोरिया के विदेश मंत्रालय ने कहा कि उनके नेता किम जोंग-उन अभी भी अमेरिका के साथ वही दोस्ताना संबंध और भरोसा चाहते हैं, जिसपर 12 जून को सिंगापुर में डॉनल्ड ट्रंप के साथ सहमति बनी थी। हैरानी की बात यह है कि माइक पॉम्पिओ दो दिन तक उत्तर कोरिया में रहे, लेकिन उनकी किम जोंग-उन से मुलाकात नहीं हुई। वह वरिष्ठ उत्तर कोरियाई अधिकारी किम योंग चोल से मिले, जो काफी समय से अमेरिका से बातचीत कर रहे हैं।  एजेंसी

 

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