मेरा कोई रिश्तेदार न तो चुनाव लड़ेगा और न ओहदेदार रहेगा: मायावती

संवाददाता
लखनऊ। बीएसपी के आल-इण्डिया के सभी छोटे-बड़े पदाधिकारियों एवं जनप्रतिनिधिगण की महत्वपूर्ण हुयी। इस बैठक देश में कुछ ही समय के बाद
लोकसभा के होने वाले आमचुनाव व इससे पहले कुछ राज्यों में भी विधानसभा के होने वाले आमचुनाव को खास ध्यान में रखकर कुछ जरूरी दिशा-निर्देश देने के लिये बुलाई गई है। इस बैठक में प्रदेश की पूर्व सीएम व बसपा सुप्रीमो मायावती उपस्थित रहीं। उन्होंने पार्टी व मूवमेन्ट के हित में इस पार्टी
के संस्थापक एवं जन्मदाता कांशीराम के जीवन से जुड़े उनके कुछ सख्त फैसलों की याद दिलाते हुए कहा कि कांशीराम ने डिफेन्स में अपनी सरकारी अधिकारी की नौकरी को छोड़कर बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के अधूरे सपने को पूरा करने का फैसला लिया था तब फिर उन्होंने इसके लिये शुरू में ही अपने जीवन के तीन अति सख्त फैसले लिये थे पहला-मैं किसी के भी शादी-विवाह, जन्म व मृत्यु आदि के कार्यक्रम में शामिल नहीं होऊँगा ताकि
मेरे जीवन का एक-एक पल पार्टी व मूवमेन्ट के कार्यों में ही लगा रहे।दूसरा-मैं आजीवन अविवाहित ही रहूँगा ताकि मैं परिवारिक मोह आदि से हमेशा
दूर रहूँ और अपने खास उद्देश्य से कभी भी भटक ना सकूँ। तीसरा- मैं बी.एस.पी. में अपने माँ-बाप, सगे भाई-बहिन एवं नजदीकी रिश्ते-नातों आदि
को भी हमेशा सक्रिय राजनीति से दूर रखूंगा। इसके साथ ही मैं उनको पार्टी में ना कोई पद दूंगा और ना ही उनको कोई चुनाव लड़ाऊंगा तथा ना ही उनको
राज्यसभा सांसद, विधायक व सरकार में मंत्री आदि भी बनाऊंगा अर्थात मेरे परिवार के ये लोग इस पार्टी में केवल एक साधारण कार्यकर्ता के रूप में
नि:स्वार्थ भावना से ही अपनी पार्टी के लिये फ्री सेवायें दे सकते हैं,इसके लिये उन्हें कोई मनाई नहीं है किन्तु इनके इस तीसरे सख्त फैसले से
उनके मां-बाप, सगे भाई-बहिन व नजदीकी रिश्ते-नाते आदि दु:खी रहते थे।उत्तर प्रदेश में विधानसभा के हुये आमचुनाव के बाद पार्टी के अधिकांश
लोगों के विशेष आग्रह पर ही थोड़ा परिवर्तन करते हुये फिर मैंने अपने छोटे भाई आनन्द कुमार को पार्टी में खासकर पेपर-वर्क को देखने के लिये
उसे पार्टी संगठन के एक पद पर रख लिया था। परन्तु इस मामले में दु:ख की बात यह रही कि इस फैसले के कुछ समय के बाद ही फिर कांग्रेस पार्टी व अन्य
पार्टियों की तरह ही बी.एस.पी. में भी परिवारवाद को बढ़ावा देने की आयेदिन मीडिया में खबरें आनी शुरू हो गई।

इसके साथ ही जो लोग अपने निजी स्वार्थ में पार्टी को छोड़कर दूसरी पार्टियों में चले गये थे तो फिर वे भी कांशीराम के जीवन के लिये गये खासकर तीसरे फैसले का हवाला देकर कांशीराम द्वारा अपने परिवार के लोगों को पार्टी संगठन में किसी भी पद पर नहीं रखने व उन्हें चुनाव आदि से भी
दूर रखने के फैसले का उदाहरण देकर अपनी पार्टी के सीधे-साधे लोगों को इसकी आड़ में गुमराह करना शुरू कर दिया था। इसके साथ-साथ मेरे अन्य
भाई-बहिन व नजदीकी रिश्ते-नाते आदि भी फिर अपने स्वार्थ में यह कहकर आनन्द कुमार की तरह ही, पार्टी के संगठन में पद पर रखने के लिये दबाव
बनाने लगे कि आनन्द कुमार से पहले हम लोग भी बहिन की देखभाल के लिये कई-कई वर्ष तक इनके साथ में रहे हैं। इसलिए हमें भी आनन्द कुमार की तरह ही मौका मिलना चाहिये। इस प्रकार, इन सब बातों को अति-गम्भीरता से लेते हुये पार्टी व मूवमेन्ट के हित में कांशीराम के जीवन से जुड़े इस सख्त
फैसले पर अर्थात पार्टी में परिवार के सभी नजदीकी सदस्यों को सक्रिय राजनीति से दूर रखने व उन्हें पार्टी में किसी भी पद पर नहीं रखने के इस
फैसले पर फिर पूरी सख्ती से मुझे अमल करना पड़ा है ताकि फिर देश में कोई भी विरोधी पार्टी व मीडिया आदि भी मुझ पर कांग्रेस व अन्य पार्टियों की
तरह कभी भी परिवारवाद को बढ़ावा देने का यह आरोप ना लगा सकें। इसके साथ-साथ मेरे परिवार के सदस्य तथा पार्टी के कोई भी छोटे-बड़े पदाधिकारी
भी इसकी आड़ में फिर इसका नाजायज़ फायदा ना उठा सके।

इस सम्बन्ध में मैं आप लोगों को यह बताना चाहती हूँ कि हमने अपनी पार्टी के संविधान में अब खास फैसला यह लिया है कि पहला-मुझे खुद को भी मिलाकर व मेरे बाद अब आगे भी बी.एस.पी. का जो भी ”राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जायेगा तो फिर उसके जीते-जी व ना रहने के बाद भी उसके परिवार के किसी भी नजदीकी सदस्य को पार्टी संगठन में उसे किसी भी स्तर के पद पर नहीं रखा जायेगा अर्थात उनके परिवार के सदस्य बिना किसी पद पर बने रहकर व एक साधारण कार्यकर्ता के रूप में ही केवल अपनी नि:स्वार्थ भावना के साथ ही पार्टी में कार्य कर सकतेहैं। दूसरा-उनके परिवार के किसी भी नजदीकी सदस्य को ना कोई चुनाव लड़ाया जायेगा तथा ना ही उसे कोई राज्यसभा सांसद, एम.एल.सी. व मंत्री आदि भी बनाया जायेगा और ना ही उसे अन्य किसी भी राजनैतिक उच्च पद पर रखा जायेगा।लेकिन पार्टी में राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद को छोड़कर बाकी अन्य सभी स्तर के पदाधिकारियों के परिवार के लोगों पर  विशेष परिस्थितियों में यह सबशर्तें लागू नहीं होगी। एक यह भी फैसला लिया गया कि बी.एस.पी. काराष्ट्रीय अध्यक्ष अपनी ज्यादा उम्र होने की वजह से जब वह पार्टी में फील्ड का कार्य करने में, अपने आपको कमजोर महसूस करता है तब फिर उसकी

सहमति से ही उसे बी.एस.पी. का राष्ट्रीय संरक्षक नियुक्त कर दिया जायेगा जिसकी सलाहानुसार ही फिर बी.एस.पी. का नया बना राष्ट्रीय अध्यक्ष कार्य
करेगा। इतना ही नहीं बल्कि अब पार्टी के लोगों को, पार्टी में किसी भी पद आदि के स्वार्थ में ना पड़कर इन्हें अपने पूरे त्याग व समर्पण के साथ ही
खासकर अपने बच्चों व आगे आने वाली पीढ़ी के खुशहाल भविष्य के लिये ही अपनी पार्टी में पूरी ईमानदारी व सच्ची लग्न के साथ ही कार्य करना चाहिये
जिनके लिये मैंने अपनी पूरी जिन्दगी भी समर्पित की है और वैसे भी मुझे अपनी पार्टी व मूवमेन्ट के हित में अभी लगभग 20-22 वर्षों तक जिन्दा रहना
बहुत जरूरी है। एस.सी. मिश्रा, राज्यसभा सांसद व राष्ट्रीय महासचिव को भी पार्टी के राष्ट्रीय स्तर पर लीगल कार्य देखने व अपरकास्ट समाज को भी
बी.एस.पी. में जोडऩे की जिम्मेवारी सौंपी गई है, हालांकि यह जिम्मेवारी इनको पहले से ही दी हुई है जो अभी भी बरकरार बनी रहेगी।इसके साथ ही अब

रामअचल राजभर के स्थान पर अति पिछड़े वर्ग से सम्बन्धित आर.एस. कुशवाहा को उत्तर प्रदेश स्टेट का अध्यक्ष बना दिया गया है, जो पार्टी के पूर्व
एम.एल.ए. व एम.एल.सी. भी रहे हैं और इन्होंने पार्टी से रायबरेली लोकसभा की सीट पर आमचुनाव भी लड़ा है। लालजी वर्मा उत्तर प्रदेश विधानसभा में
बी.एस.पी. विधायक दल के नेता को, छत्तीसगढ़ स्टेट का कोओडिनेटर बना दिया गया है। हालांकि इनको इससे बड़ी जिम्मेवारी सौंपी जानी थी, लेकिन परिवार में इनके एकमात्र पुत्र की मृत्यु होने की वजह से अब इनको कुछ समय अपनेपरिवार को भी देना बहुत जरुरी हो गया है। इसके अलावा, कुछ और भी राज्यों में थोड़े परिवर्तन किये गये हैं जिनकी जानकारी सम्बन्धित राज्यों को अलग से दे दी गयी है। अब चुनावों में आगे गठबन्धन करके चुनाव लडऩे का सवाल है तो इस सम्बन्ध में वैसे आप लोगों को यह मालूम है कि हमारी पार्टी ने इस सम्बन्ध में शुरू से ही यह फैसला लिया है कि हमारी पार्टी किसी भी राज्य
में व किसी भी चुनाव में, किसी भी पार्टी के साथ केवल ”सम्मानजनकसीटें मिलने की स्थिति में ही तब फिर वहां उस पार्टी के साथ कोई चुनावी
गठबन्धन-समझौता करेगी अन्यथा फिर हमारी पार्टी अकेली ही चुनाव लडऩाज्यादा बेहतर समझती है। हालांकि इस मामले में हमारी पार्टी की उत्तर
प्रदेश सहित कई और राज्यों में भी गठबन्धन करके चुनाव लडऩे की बात-चीत चल रही है, लेकिन फिर भी आप लोगों को हर परिस्थिति का मुकाबला करने के लियेअपने-अपने प्रदेश में पार्टी के संगठन को हर स्तर पर तैयार करना है। इसके साथ ही मायावती ने उत्तर प्रदेश के बाहर के राज्यों से आये बी.एस.पी के
पदाधिकारियों की राज्यवार भी अलग-अलग से बैठकें लीं, जिसमें उनके राज्योंके पार्टी के कार्यों की समीक्षा की गई तथा आगे की तैयारियों के समबंध
में जरुरी दिशा-निर्देंश भी दिये गये।

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