गैरों पर करम अपनो पर सितम

संवाददाता
लखनऊ। वर्ष 1968 में आयी फिल्म आंखे का गैरों पर करम अपनो पर सितम का गाना 2018 में भाजपा पर चरितार्थ होता दिख रहा है। प्रदेश की पूर्ववर्ती सपा सरकार को प्रदेश से उखाड़कर बाहर करने वालों में प्रमुख भूमिका निभाने वाले भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डा. लक्ष्मीकान्त बाजपेयी भाजपा के एमएलसी भी नही बन सके। पहले राज्यसभा में श्री बाजपेयी का नाम काफी तेजी से चला पर राज्यसभा में भी सपा से आये अशोक बाजपेयी को राज्यसभा भेजकर श्री बाजपेयी के नाम को रोक दिया गया।

राज्यसभा के बाद एमएलसी चुनाव में भी लक्ष्मीकान्त बाजपेयी के एमएलसी बनने की प्रबल संभावना थी, पर पार्टी सेके्रटरी जेपी नड्डïा द्वारा जारी की गयी सूची में श्री बाजपेयी जगह बनाने में कामयाब नहीं हो सके। पार्टी ने जिन दस नामों की घोषणा की है, उनमें से चार नाम उन दलबदलु नेताओं के हैं, जो सत्ता के साथ चिपके रहते हैं। डा. लक्ष्मीकान्त बाजपेयी उस समय पार्टी के अध्यक्ष हुआ करते थे, जब प्रदेश में समाजवादी की सत्ता काबिज थी।

सपा की हर विफलताओं को उन्होंने विपक्ष में रहते जमीनी स्तर पर जिस तरह से उठाया उससे प्रदेश की जनता का भाजपा के प्रति विश्वास बढ़ता गया और जिसका परिणाम यह हुआ कि विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी सत्ता से बाहर हो गयी। लाशों का डंपिंग ग्राउंड बना लखनऊ व नागिन की तरह बसा लिया जैसे हिट बाउंसर मारने वाले बाजपेयी ने पार्टी को प्रदेश में मजबूती की स्थिति में खड़ा किया पर विधानसभा चुनाव में चुनाव हारने के बाद से ही लगातार श्री बाजपेयी हाशिये पर चल रहे हैं।

श्री बाजपेयी के अतिरिक्त भाजपा के और कई वरिष्ठï व निष्ठïावान पदाधिकारियों को भी एमएलसी चुनाव में नजर अंदाज किया गया जिनमें प्रमुख रूप से वाराणसी दक्षिण से सात बार विधायक रहे श्याम देव राय चौधरी, संगठन मंत्री अशोक तिवारी, भाजपा मुख्यालय प्रभारी भारत दीक्षित, पूर्व मंत्री हरद्वार दूबे, यशवन्त सैनी व आलोक अवस्थी प्रमुख रहे।

दलबदलुओं को भाजपा ने दिया ईनाम
सपा, बसपा की परिक्रमा कर भाजपा में शामिल होकर पवित्र होने वाले दलबदलु नेताओं को भाजपा ने एमएलसी का प्रत्याशी बनाकर उन्हें इनाम दे दिया है। सपा से भाजपा में आने वाले इन नेताओं में प्रमुख रूप से यशवन्त सिंह, सरोजनी अग्रवाल व जयबीर सिंह जो कि बसपा से आये प्रमुख हैं। इन दलबदलु नेताओं के आगे पार्टी के कर्मठ कार्यकर्ता बौने साबित हुए। इससे पूर्व राज्यसभा चुनाव में भी सपा से भाजपा में आये डा. अशोक बाजपेयी व अनिल अग्रवाल को भाजपा ने राज्यसभा भेजकर उपकृत किया था।

नहीं काम आया शाह का आश्वासन
विधानसभा चुनाव के समय जब वाराणसी की दक्षिण विधानसभा से सात बार के विधायक रहे श्याम देव राय चौधरी का टिकट काटकर नीलकण्ठ तिवारी को टिकट दिया गया तो वहां की जनता भी भाजपा के इस कदम से नाराज हुयी थी, साथ ही पूर्व विधायक श्याम देव राय चौधरी दादा शान्त हो गये थे। भाजपा के राष्टï्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने पूर्व विधायक श्याम देव राय चौधरी को 2018 में एमएलसी बनाये जाने का आश्वासन भी दिया था, पर समय के साथ वह आश्वासन भी खत्म होता गया और पूर्व विधायक आज तक एमएलसी बनने में कामयाब नहीं हो सके।

भाजपा हमारी मां पार्टी का निर्णय उचित:लक्ष्मीकान्त
राज्यसभा व एमएलसी चुनाव में टिकट न मिलने के बारे में जब भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डा. लक्ष्मीकान्त बाजपेयी से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो श्री बाजपेयी ने कहा कि ऐसा नहीं सोचना चाहिए। पार्टी हमारी मां है। मुझे घर से बुलाकर आठ बार टिकट दिया गया, मंत्री बनाया गया साथ ही घर से बुलाकर भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। श्री बाजपेयी ने कहा कि मेरा मानना है कि जो भी दायित्व मिले उसका निर्वहन पूरी जिम्मेदारी से किया जाना चाहिए। हो सकता है पार्टी मेरे लिए कुछ और अच्छा सोच रही हो।

दलबदलुओं के टिकट पर पदाधिकारियों ने साधी चुप्पी
भाजपा की निर्मल गंगा में पवित्र हो रहे दलबदलुओं को राज्यसभा, विधान परिषद का टिकट मिलने के सवाल पर भाजपा के कई पदाधिकारियों से उनके मन की बात जानने का प्रयास किया गया तो ज्यादातर लोग इस मामले पर चुप्पी ही साधे रहे। कई पदाधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर इस बात को स्वीकारा किया पार्टी लगातार कर्मठ और संघर्षशील पदाधिकारियों की अनदेखी कर रही है जिसका खामियाजा पार्टी को भुगतना पड़ सकता है।

भाजपा में आते ही बुक्कल के धुल गये जालसाजी व अवैध निर्माण के दाग
समाजवादी सरकार के एमएलसी रहे जिन बुक्कल नवाब का विरोध भाजपा लगातार करती रहती थी, उन्हीं बुक्कल नवाब के भाजपा में आते ही उनकी जालसजी व अवैध निर्माण के दाग धुल गये। भाजपा ने बुक्कल नवाब को न सिर्फ पार्टी की सदस्यता दिलवायी बल्कि उन्हें एमएलसी बनाकर धुलाई का सर्टिफिकेट भी दे दिया। बुक्कल को जिला प्रशासन ने गोमती नदी के किनारे की जमीन हथिया कर गलत तरीके से सरकारी मुआवजा छह करोड़ 94 लाख लेने और हुसैनाबाद हेरिटेज जोन में अवैध निर्माण का दोषी मानते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश दिया था, पर बुक्कल के सारे दाग भाजपा की वाशिंग मशीन में धुल गये।

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