संथारा को कानूनी मान्यता देने सांसद का समर्थन

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नई दिल्ली । संथारा (सल्लेखना) को कानूनी मान्यता देने के लिए चित्तौड़गढ़ के सांसद सीपी जोशी ने संसद की याचिका कमेटी के समक्ष अपना पक्ष रखा। सांसद जोशी ने कहा जैन धर्म में अन्न, जल त्याग करके शरीर त्याग करने की परंपरा को अपराध की श्रेणी से बाहर रखा जाए।

कमेटी ने शुक्रवार को सरकार और सदस्यों की राय जानकर, इससे संबंधित कानूनी प्रावधानों पर चर्चा की है। सीपी जोशी ने संथारा के समर्थन मैं कहा कई देशों में मर्सी किलिंग को मान्यता प्राप्त है। आत्महत्या और संथारा को एक ही श्रेणी में नहीं माना जा सकता है आत्महत्या क्षणिक आवेश या व्यक्ति अपने जीवन से परेशान होकर अपना अस्तित्व समाप्त करता है।

जबकि संथारा में व्यक्ति अपनी इच्छा परिवार और समाज की सहमति के बाद जब उसका शरीर चलने फिरने लायक नहीं होता है। तब यह प्रक्रिया अपनाता है। जोशी ने सनातन परंपरा का भी उल्लेख करते हुए संथारा को आत्मा से परमात्मा का मिलन मानने की बात कही है।

सरकार की ओर से गृह मंत्रालय के अधिकारियों को बुलाया गया था। गृह मंत्रालय के अधिकारी संथारा को कानूनी मान्यता देने के पक्ष में नहीं थे। उन्होंने इसे आपराधिक कृत्य माना है। कमेटी इस मामले में सभी पक्षों की राय जानने के बाद अपनी अनुशंसा करेगी। agency

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