अत्याधुनिक तकनीक ओ-आर्म, ओ2 सर्जरी ने कोकिलाबेन अस्पताल में महिला को दिया नया जीवन

 

समय भास्कर / मुंबई, भारत में प्रचलित बिमारियों में से, रीढ़ की चोटों और इससे जुडी विकृतिया हमारी जीवनशैली शहरों में बुनियादी ढांचे और समग्न तनावपूर्ण जीवनशैली के कारण तेज गति से बढ़ रही है। सर्जरी के सबसे बुरे परिणाम लकवा,इंफेक्शन और हमेशा के लिए बिस्तर पकड़ना हो सकता है। यही कारण है कि लाखों भारतीय जरुरी होने पर भी सर्जरी नहीं कराते है और इस तरह जीवन की गुणवत्ता से समझौता करते है।

रीढ़ की हड्डी टूटी 35 वर्षीय महिला नीचे के हिस्से में लकवा ग्रस्त थी——

हालांकि अब सुरक्षित स्पाइन सर्जरी के लिए अच्छी खबर है, क्योंकि स्पाइन सर्जरी सूट में तकनीकी विकास हुआ है। कोकिलाबेन अम्बानी अस्पताल में स्पाइन सर्जरी सूट में कई तकनीकें जैसे ओ-आर्म, ओ2, सर्जिकल इमेजिंग सिस्टम, स्टेल्थस्टेशन, एस8, सर्जिकल नेविगेशन सिस्टम, ट्रिओस सर्जिकल टेबल और ओपीएम्आई पेंटरो 900 सर्जिकल माइक्रोस्कोप उपलब्ध है। बहुत कम चीर-फाड् वाली स्पाइन सर्जरी काफी सुरक्षित, अधिक सटीक और बेहतर परिणाम देने वाली होती है। स्पाइन सूट में सर्जिकल स्किल्स और तकनीकों का बेहतर मिश्रण होता है।

कोकिलाबेन अम्बानी अस्पताल में स्पाइन सर्जरी डिपार्टमेंट हेड, डॉ विशाल पेषत्तिवार का कहना है “यह क्रांतिकारी तकनीक रीढ़ की हड्डी को सुरक्षित और सटीक बनाती है। स्पाइन सूट में आयोजित सर्जरी पुराने सर्जिकल तरीकों से कम घाव देती है और इससे अस्पताल में भी बहुत कम समय की आवश्यकता होती है। ” हालिया एक केस स्टडी का जिक्र करते हुए डॉ विशाल बताते है ” एक बहुत परेशान परिवार 35 वर्ष की एक महिला को लेकर आया। यह महिला एक दुर्घटना के बाद बिस्तर पर रहने को मजबूर थी।

कावेरी (बदला हुआ नाम) सांगली से कोकिलाबेन अम्बानी अस्पताल लाई गई थी। छत से गिरने के कारण उसकी रीढ़ की हड्डी टूट गई थी। उसके शहर में हुई स्पाइन सर्जरी से उसे कुछ आराम मिला, लेकिन उसके नीचे के हिस्से में लकवा आ गया और मूत्र व शौच पर उसका नियंत्रण ख़त्म हो गया। उसकी स्पाइनल कॉर्ड के आसपास के हिस्से में फ्लूएड लिक हो रहा था। कोकिलाबेन के सर्जरी टीम ने उसकी स्थिति का मूल्यांकन किया और फिर से उसकी सर्जरी की। प्रतिभा और तकनीक के इस संगम से चार वर्ष के बच्चे की इस माँ के निचले हिस्से का लकवा ठीक हुआ और वह फिर से सही ढंग से मूत्र और शौच करने लगी। अब वह फिर से पूरी तरह ठीक हो रही है। ”

किसी भी सर्जिकल टीम को बेहतर परिणाम प्राप्त करने के लिए अच्छी इमेजिंग तकनीकों की जरुरत होती है। रिट्रैचेबल ओ-आर्म ऑपरेटिंग टेबल के चारों तरफ घूम सकती है और जिस स्थान का ऑपरेशन किया जाना है, उसकी थ्रीडी इमेज दे सकता है। मरीज की माइक्रोसर्जरी के लिए गए चार छेदों में से एक में कैमेरा जाता है और इससे जो इमेज मिलती है, उस पर इमेज को सुपरइंपोज किया जाता है। ओ-आर्म ओ2 इंट्रा ऑपरेटिव इमेजिंग सिस्टम इंट्रा ऑपरेटिव इमेजिंग को अलग ही स्तर पर ले गई है, क्योंकि यह सर्जन को उस समय सुचना देती है, जब उसे इसकी सबसे ज्यादा जरुरत होती है। agency

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